नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में कीमती धातुओं की बादशाहत और अधिक मजबूत होकर उभरी है। साल 2025 में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने के बाद, सोना और चांदी ने 2026 के पहले कारोबारी सप्ताह में भी अपनी तेजी की रफ्तार को बरकरार रखा है। शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों ने नए शिखर को छुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा इन सुरक्षित संपत्तियों पर और गहरा गया है।
बाजार का ताजा हाल: आसमान छूती कीमतें
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) का भाव 0.9 फीसदी की बढ़त के साथ 4,351.70 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। सोने के नक्शेकदम पर चलते हुए स्पॉट सिल्वर (Spot Silver) ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया और 2 फीसदी की छलांग लगाकर 72.63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार किया।
उल्लेखनीय है कि 2025 का साल सोने के लिए पिछले 46 वर्षों में सबसे शानदार रहा था, जबकि चांदी ने अपने पूरे इतिहास की सबसे बड़ी सालाना तेजी दर्ज की थी। यह रुझान अब 2026 में भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
तेजी के पीछे के मुख्य कारक
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल मांग और आपूर्ति का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण हैं:
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केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने का भंडारण कर रहे हैं।
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ETF में निवेश का प्रवाह: एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) के जरिए खुदरा और संस्थागत निवेशकों का पैसा लगातार कीमती धातुओं में आ रहा है।
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भू-राजनीतिक अस्थिरता: मध्य-पूर्व और यूरोप में जारी तनाव ने निवेशकों को 'सेफ हैवन' (Safe Haven) की तलाश में सोने की ओर धकेला है।
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मुद्रास्फीति और डॉलर का जोखिम: डॉलर की क्रय शक्ति में संभावित गिरावट के खिलाफ सोना एक मजबूत कवच (Hedge) बनकर उभरा है।
विशेषज्ञों की राय: सुरक्षा बनाम रिटर्न
मिजुहो के एशिया मैक्रो रिसर्च हेड विष्णु वराथन के अनुसार, सोना और चांदी की यह मौजूदा मांग अमेरिकी डॉलर के कमजोर पड़ने के जोखिम के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह है। वे बताते हैं कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में निवेशक अब केवल ऊंचे रिटर्न की तलाश में नहीं हैं, बल्कि वे अपनी 'पूंजी की सुरक्षा' (Capital Preservation) को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
वहीं, PL वेल्थ के सीईओ इंदरबीर सिंह जॉली का मानना है कि सोने की कीमतों में यह उछाल निवेशकों के व्यवहार में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। उनके मुताबिक: "यह तेजी किसी अल्पकालिक सट्टेबाजी का परिणाम नहीं है। शेयर बाजारों के ऊंचे वैल्यूएशन और वैश्विक जोखिमों के कारण अब सोना केवल ट्रेडिंग का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि यह एक रणनीतिक और अनिवार्य निवेश विकल्प बन गया है।"
आगे की राह: क्या और बढ़ेंगे दाम?
बाजार के मौजूदा सेटअप को देखते हुए विश्लेषकों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी, कीमती धातुओं की चमक फीकी नहीं पड़ेगी। 2026 के अंत तक सोने के भाव में और अधिक इजाफे की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह पारंपरिक निवेशकों के साथ-साथ नए जमाने के निवेशकों के लिए भी पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बना रहेगा।