शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। करीब 25 साल बाद निफ्टी के एक्सपायरी नियम में अहम बदलाव किया जा रहा है। SEBI (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) ने इस बदलाव को मंजूरी दी है, जिसके तहत अब निफ्टी के फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी गुरुवार की जगह मंगलवार को होगी। यह नया नियम 1 सितंबर 2025 से लागू हो जाएगा। SEBI का कहना है कि इस बदलाव से निवेशकों को फायदा होगा और बाजार में स्थिरता आएगी।
निफ्टी एक्सपायरी का इतिहास
निफ्टी 50 की शुरुआत 22 अप्रैल 1996 को हुई थी। इसके बाद फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत 12 जून 2000 को हुई और पहली बार एक्सपायरी 29 जून 2000 को हुई थी। उस समय एक्सपायरी सिर्फ महीने के आखिरी गुरुवार को होती थी। फिर साल 2019 में इसे वीकली एक्सपायरी में बदला गया, लेकिन एक्सपायरी का दिन गुरुवार ही रखा गया। अब, NSE ने एक्सपायरी का दिन बदलकर मंगलवार कर दिया है।
निफ्टी एक्सपायरी क्या होती है?
निफ्टी एक्सपायरी से तात्पर्य फ्यूचर्स और ऑप्शन्स कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति तिथि से है। जब कोई निवेशक निफ्टी पर फ्यूचर या ऑप्शन खरीदता है, तो उसका एक निश्चित निपटान दिन होता है, जिसे एक्सपायरी डे कहते हैं। इस दिन तक ही वह कॉन्ट्रैक्ट वैध होता है। एक्सपायरी के बाद उसका निपटान (सेटलमेंट) होता है और उस ट्रेड का हिसाब-किताब पूरा होता है।
क्यों बदला जा रहा है एक्सपायरी का दिन?
विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार की जगह मंगलवार को एक्सपायरी करने से बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव कम होंगे। आजकल वीकली और मंथली दोनों एक्सपायरी के कारण बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव और तकनीकी जटिलताएं देखने को मिलती हैं। मंगलवार को एक्सपायरी से बाजार की वोलैटिलिटी (volatility) में कमी आएगी और जोखिम का प्रबंधन बेहतर होगा।
इस बदलाव से क्या फायदे होंगे?
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बाजार स्थिर होगा — एक्सपायरी के दिन का बदलाव बाजार में अनावश्यक गड़बड़ी और उतार-चढ़ाव को कम करेगा, जिससे बाजार ज्यादा स्थिर रहेगा।
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निवेशक को स्पष्टता — एक्सपायरी का दिन निश्चित होने से निवेशकों को ट्रेडिंग में अधिक स्पष्टता मिलेगी। वे बेहतर रणनीति बना सकेंगे।
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ट्रेडिंग सरल और पारदर्शी — SEBI का यह कदम डेरिवेटिव ट्रेडिंग को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे मार्केट में विश्वास बढ़ेगा।
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हफ्ते में दबाव कम होगा — अब एक्सपायरी के कारण मार्केट पर हफ्ते में केवल दो दिन दबाव बनेगा, जिससे निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने का मौका मिलेगा।
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दोनों एक्सचेंज में संतुलन — यह बदलाव NSE और BSE दोनों को संतुलित रखने में मदद करेगा, जिससे ट्रेडिंग और सेटलमेंट की प्रक्रिया आसान होगी।
निष्कर्ष
निफ्टी एक्सपायरी के दिन में यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। SEBI और NSE द्वारा किए गए इस सुधार से न सिर्फ बाजार में स्थिरता आएगी बल्कि निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए जोखिम कम होगा। इस बदलाव के बाद, भारतीय स्टॉक मार्केट की डेरिवेटिव ट्रेडिंग अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित हो जाएगी, जिससे देश के वित्तीय बाजारों की मजबूती और बढ़ेगी।
निवेशक और ट्रेडर्स को इस बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए और अपने ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी को नए नियमों के अनुरूप अपडेट करना होगा। आगामी 1 सितंबर से यह नया नियम लागू होगा, जो भविष्य में भारतीय शेयर बाजार के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।